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वैसे तो इस तरह के तमाम ब्लॉग उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ काफी प्रसिद्ध हैं. इस ब्लॉग को शुरू करने का हमारा उद्देश्य कम फोलोवर्स से जूझ रहे ब्लॉग्स का प्रचार करना एवं वे लोग जो ब्लॉग बनाना चाहते हैं परन्तु अज्ञान वश बना नहीं पाते या फिर अपने ब्लॉग का रूप, रंग ढंग नहीं बदल पाते उनकी समस्या का समाधान करना भी है. परन्तु यदि नए ब्लॉग नवीनीकरण (अर्थात update ) नहीं होंगे उनके लिंक नहीं लगाये जायेंगे उनकी जगह अन्य लिनक्स को स्थान दिया जायेगा. साथ ही साथ प्रतिदिन एक या दो विशेष रचना "विशेष रचना कोना' पर प्रस्तुत की जायेंगी और "परिचय कोना" पर परिचय भी दिया जायेगा. ब्लॉग में किसी भी तरह की समस्या को इस पते पर लिख भेजें : blogprasaran@gmail.com समाधान हेतु यथासंभव प्रयास किया जायेगा....

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Monday, October 28, 2013

ब्लॉग प्रसारण: सोमवारीय अंक

नमस्कार , मैं नीरज कुमार नीर उपस्थित हूँ ब्लॉग प्रसारण के सोमवारीय अंक के साथ आपके लिए प्रस्तुत हैं मेरे द्वारा चुने हुए कुछ लिंक्स . पढ़िए और कमेंट्स के द्वारा अपनी पसंद नापसंद अवश्य बताइए . नए ब्लॉगर से जिन्हें अपने ब्लॉग पर पाठकों की संख्या बढ़ानी है , खास अनुरोध है कि आप अगर दूसरों को पढेंगे और कमेंट्स देंगे तो ही लोग आपके ब्लॉग के बारे में जानेंगे ..

बचपन, भाषा, देश 

प्रवीण पाण्डेय

स्वप्न न बुनूँ ....तो क्या करूँ  

ताना बाना है जीवन का ......

भुवन की कलाकृति ....

आँखें टकटकी लगाए ताक रही हैं .....

अनंत स्मिति....

सपना और मैं 

हेलोवीन का वैश्विक स्वरूप  

जय, जय, जय शोभन सरकार 

आने वाले हैं अब चुनाव,

कहां है सौना मुझे बताओ,

कृपा करो मुझ पर अब,

जय, जय, जय शोभन सरकार...

मुझे तेरा प्यार याद है 

मानव हैं तो

समय को तो पढ़ ही लेंगे

मानव हैं तो

दिशा को पहचान ही लेंगे

किया है प्रयास कई बार

मेरी बददुआ 

अम्मा  

मिनाक्षी मिश्रा तिवारी की कहानी

आवो हर दिल में दीप जलाएं 

लड्डू,बर्फी,काजू-कतली,

ड्राई फ्रूट्स व मेवा होगा ।

तरह-तरह के उपहारों का,

खुब लेना-देना होगा ॥

 भ्रष्टाचार से दो-दो हाथ करेंगे सनी 

 
और इसी के साथ मुझे दीजिये इजाजत , पुनः मुलाकात होगी अगले सोमवार को. आपका धन्यवाद .

30 comments:

  1. आद्रणीय खूबसूरत लिंकों के साथ सुंदर प्रसारण किया है आपने...

    सादर।

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  2. सुन्र, रोचक व पठनीय सूत्र। आभार।

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  3. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार नीरज भाई-

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  4. बढ़िया संकलन ...हृदय से आभार मेरी कृति को स्थान दिया .......!

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  5. ताना बाना है जीवन का ......
    भुवन की कलाकृति ....
    आँखें टकटकी लगाए ताक रही हैं .....
    अनंत स्मिति.....
    घड़ी की टिक टिक चलती ......


    समय जैसे चलता चलता भी ...रुका हुआ ....

    शिशिर की अलसाई हुई सी प्रात ... .....
    झीनी झीनी सी धूप खिलती शनैः शनैः ........
    शीतल अनिल संग संदेसवाहक आए हैं ....
    सँदेसा लाये हैं ....
    उदीप्त हुई आकांक्षाएँ हैं .....
    ......ले आए हैं मधुमालती की सुरभि से भरे ...
    कुछ कोमल शब्द मुझ तक ....
    ...अनिंद्य आनंद दिगंतर ....
    तरंगित भाव शिराएँ हैं ....!!

    गुनगुनी सी धूप और ये कोमल शब्द-
    सुरभित अंतर ...
    कल्पना दिगंतर ....
    भाव झरते निरंतर ....
    स्वप्न न बुनूँ ....तो क्या करूँ ....??

    रूपकत्व लिए बेहतरीन रचना।

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  6. बहुत मार्मिक ताना बाना बुना है अम्मा का। अम्मा किसी की भी हो कहीं जाती नहीं है। अम्मा एक शरीर नहीं सौंदर्य का नाम है और ये और ऐसी तमाम अम्मा आज बेहद उपेक्षित हैं किनकी अ -संगठित क्षेत्र है बरतन भांडे करने का काम। कोई सुरक्षा कोई इंक्रीमेंट कोई छुट्टी नहीं।

    एक दिन खबर आई "अम्मा" नहीं रहीं ...... बस उस घर पर दूसरी गाज गिरी हो जैसे ...... बच्चे और उदास हो गये ..... पर उसे तो जाना ही था !!
    वो चली गयी,पर घर में सभी उसको याद करते रहते, सबके दिलों में जिंदा थी वो ...... !!

    बच्चे उस घर के एक बार फिर से अनाथ हो गए। क्योंकि ये अम्मा तो रेखा का भी पालना थी ,अम्मा की भी अम्मा थी।

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  7. बहुत मार्मिक ताना बाना बुना है अम्मा का। अम्मा किसी की भी हो कहीं जाती नहीं है। अम्मा एक शरीर नहीं सौंदर्य का नाम है और ये और ऐसी तमाम अम्मा आज बेहद उपेक्षित हैं किनकी अ -संगठित क्षेत्र है बरतन भांडे करने का काम। कोई सुरक्षा कोई इंक्रीमेंट कोई छुट्टी नहीं।

    एक दिन खबर आई "अम्मा" नहीं रहीं ...... बस उस घर पर दूसरी गाज गिरी हो जैसे ...... बच्चे और उदास हो गये ..... पर उसे तो जाना ही था !!
    वो चली गयी,पर घर में सभी उसको याद करते रहते, सबके दिलों में जिंदा थी वो ...... !!

    बच्चे उस घर के एक बार फिर से अनाथ हो गए। क्योंकि ये अम्मा तो रेखा का भी पालना थी ,अम्मा की भी अम्मा थी।

    अम्मा
    मिनाक्षी मिश्रा तिवारी की कहानी

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  8. सारा रूप विधान रूपक तत्व कविता का अभिनव है। अभिव्यक्ति का एक उफान है यह रचना।

    मेरी बद्दुआ….

    इक शख्स को बद्दुआ दी थी मैने इक बार,
    उस रात मैं तकिया भर रोई थी...
    फ़िर बहुत सारी सूखी सुबहों के बीच
    भूल गयी मैं,
    नाखून से उस रात फाडा हुआ
    चादर का कोना...
    लेकिन समय नहीं भूला
    और नहीं भूली निर्जीव कहलाती कोई भी वस्तु
    जिस पर एक टूटी फूटी सड़क बनाई थी मैंने उस रात...
    आज ही एक डाक से
    आया है उसके पूरे होने का संदेसा
    और स्याही के थप्पडों से नींद खुली है तो देख रही हूँ
    साथ में संलग्न की गयी है
    मेरी बद्दुआ….

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  9. नीरज भाई,
    सुंदर लिंक्स के साथ आज का आकर्षक प्रसारण वाकई मे दिल को छू लेने वाला है,मेरी रचना "आवो हर दिल मे दीप जलाएं",शामिल करने के लिये आपका दिल से आभार..और आपको व आपकी पुरी टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनायें....

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  10. आदरणीय नीरज जी,
    मेरे ब्लॉग 'सौम्य वचन' की पोस्ट 'भ्रष्टाचार से दो-दो हाथ करेंगे सनी' को इस आकर्षक संकलन में शामिल करने के लिए धन्यवाद...
    http://somya-aparajita.blogspot.in/

    सादर...
    -सौम्या अपराजिता

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  11. मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका आभार !
    नई पोस्ट सपना और मैं (नायिका )

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  12. बहुत बढ़िया ब्लॉग प्रसारण प्रस्तुति

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  13. .धनतेरस की शुभकामना!

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  14. वाह...उत्तम....दीपावली की शुभकामनाएं.....

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  15. सुंदर सार्थक एवँ पठनीय सूत्र ! दीपावली की सभी पाठकों को हार्दिक मंगलकामनायें !

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  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  17. बहुत अच्छे लिंकों के साथ सुंदर प्रसारण किया है आपने स्वयं शून्य

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